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भारत में कोर्ट मैरिज — पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और कानूनी आवश्यकताएं

विशेष विवाह अधिनियम के तहत भारत में कोर्ट मैरिज की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड। दस्तावेज़, नोटिस अवधि, शुल्क और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया।

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अस्वीकरण: यह एक स्वतंत्र सूचनात्मक गाइड है। हम किसी भी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं हैं। कृपया हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जाँच करें।

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कोर्ट मैरिज क्या है?

कोर्ट मैरिज विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत होती है। यह किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के दो व्यक्तियों के बीच हो सकती है — किसी धार्मिक अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं।

पात्रता

  • वर की आयु 21 वर्ष या अधिक
  • वधू की आयु 18 वर्ष या अधिक
  • दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ
  • दोनों पहले से विवाहित नहीं (तलाक/विधवा/विधुर हो सकते हैं)
  • निषिद्ध संबंध में नहीं (रक्त संबंध)

ज़रूरी दस्तावेज़

दोनों पक्षों के लिए

  • आयु प्रमाण: जन्म प्रमाणपत्र, 10वीं मार्कशीट, या पासपोर्ट
  • पते का प्रमाण: Aadhaar, वोटर ID, बिजली बिल
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो (संयुक्त और व्यक्तिगत)
  • पहचान पत्र: Aadhaar, PAN, पासपोर्ट
  • शपथ पत्र: वैवाहिक स्थिति, आयु और सहमति का

अतिरिक्त (अगर लागू)

  • तलाक का आदेश (पहले शादी थी तो)
  • मृत्यु प्रमाणपत्र (विधवा/विधुर)
  • माता-पिता की सहमति (अनिवार्य नहीं, लेकिन सिफारिश)

कोर्ट मैरिज प्रक्रिया

स्टेप 1: नोटिस दें

  • विवाह अधिकारी (Marriage Officer/Sub-Registrar) को लिखित नोटिस दें
  • दोनों में से एक पक्ष कम से कम 30 दिन से उस ज़िले में रहता हो
  • शुल्क: ₹100-500 (राज्य अनुसार)

स्टेप 2: नोटिस प्रकाशन (30 दिन)

  • नोटिस 30 दिन के लिए कार्यालय में प्रदर्शित होता है
  • इस दौरान कोई भी आपत्ति दर्ज कर सकता है
  • आपत्ति नहीं आई तो आगे बढ़ सकते हैं

स्टेप 3: आपत्ति निपटान (अगर हो)

  • आपत्ति आने पर विवाह अधिकारी 30 दिनों में निर्णय लेता है

स्टेप 4: विवाह संपन्न

  • नोटिस अवधि के बाद विवाह अधिकारी के समक्ष विवाह
  • 3 गवाह ज़रूरी (दोनों पक्षों से)
  • दोनों पक्ष और गवाह हस्ताक्षर करें
  • विवाह प्रमाणपत्र तुरंत जारी होता है

कोर्ट मैरिज शुल्क

मद शुल्क
नोटिस शुल्क ₹100-500
विवाह रजिस्ट्रेशन ₹100-500
स्टाम्प पेपर ₹100-200
शपथ पत्र ₹200-500
कुल अनुमानित ₹500-2,000

कोर्ट मैरिज vs धार्मिक विवाह

पैरामीटर कोर्ट मैरिज धार्मिक विवाह
कानून विशेष विवाह अधिनियम हिंदू विवाह, मुस्लिम पर्सनल लॉ आदि
अनुष्ठान नहीं हाँ
अंतर-धर्मीय आसान जटिल
नोटिस अवधि 30 दिन नहीं
प्रमाणपत्र तुरंत अलग से रजिस्ट्रेशन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोर्ट मैरिज में कितना समय लगता है?

नोटिस देने के 30 दिन बाद विवाह हो सकता है। कुल प्रक्रिया 30-45 दिन।

क्या कोर्ट मैरिज के लिए वकील ज़रूरी है?

कानूनी रूप से ज़रूरी नहीं, लेकिन दस्तावेज़ तैयारी और प्रक्रिया में वकील मदद कर सकते हैं।

कोर्ट मैरिज में माता-पिता की सहमति ज़रूरी है?

नहीं, अगर दोनों पक्ष वयस्क हैं (वर 21+, वधू 18+) तो माता-पिता की सहमति अनिवार्य नहीं।


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